क्षणिका
गैरों के साथ-साथ
अपनों ने भी
इस दिल को निचोड़ा है।
इसीलिये कम्बख्त
थोड़ा कड़वा
थोड़ा मीठा
ये निगोड़ा है।
'ललित'
जून 2026 की रचनाएँ 01.06.2026 कुण्डलिनी छंद आएँगीं कठिनाइयाँ,पथ में होंगें शूल। कंटक देंगें यातना,चुभ जाएँगें फूल। चुभ जाएँगें फूल,समय भ...
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