Showing posts with label मनहरण. Show all posts
Showing posts with label मनहरण. Show all posts

17 मनहरण घनाक्षरी साझा काव्य संग्रह

मनहरण घनाक्षरी

1 बेटी जन्म

सूने सूने अँगना में,मेरी प्यारी बगिया में।
आई इक नन्ही परी,घर महका दिया।

बोलती है तुतलाती,चलती है इठलाती।
फुदक-फुदक आती,पग लहका दिया।

कूकती है कोयल सी,झूमती है बदरा सी।
चुलबुली चिड़िया सी,मन चहका दिया।

चमके ज्यूँ चँदनियाँ,पहने है पैंजनियाँ।
पराई हूँ यही बोल,मन दहका दिया।

2  अजन्मी बेटी की अरज

बेटी

मैया मैं दुलारी तेरी,सुनले अरज मेरी।
जग में आने दे मुझे,कभी न सताऊँगी।

कलेजे का टुकड़ा हूँ,तेरा ही तो मुखड़ा हूँ
घर में आने दे मुझे,सदा मुसकाऊँगी।

तू जो मुख मोड़ लेगी,मेरा दम तोड़ देगी।
समझ न पाऊँ तुझे,कैसे भूल पाऊँगी।

तू भी जब आई होगी,तेरी कोई माई होगी।
जैसे पाल लिया तुझे,मैं भी पल जाऊँगी।

'ललित'

जून 2026 की रचनाएँ

जून 2026 की रचनाएँ 01.06.2026 कुण्डलिनी छंद आएँगीं कठिनाइयाँ,पथ में होंगें शूल। कंटक देंगें यातना,चुभ जाएँगें फूल। चुभ जाएँगें फूल,समय भ...