सितम्बर 2026 की रचनाएँ

07.09.26
चौपई छंद

हम पर कृपा करो हनुमान,संकट मोचन कृपा निधान।
अब लो पवनपुत्र ये जान,तुम हो बल में पवन समान।

सुन लो प्रार्थना महावीर,हर लो सब संकट सब पीर।
अपनी सेना भेजो वीर,धरी न जाती है अब धीर।
अटके संकट में हैं प्राण,रक्षा करो वीर हनुमान।
हम पर कृपा करो हनुमान,संकट मोचन कृपा निधान।

चोला सिंदूरी ले धार,तुमने किया खूब श्रृंगार।
खुश सिंदूर देख हों राम,निशिदिन जपो राम का नाम।
हम को बल-बुधि-विद्या-ज्ञान,दे दो भक्ति-शक्ति वरदान।
हम पर कृपा करो हनुमान,संकट मोचन कृपा निधान।

ललित किशोर 'ललित'

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18.09.2026
प्रार्थना
आल्हा छंद

क्या बतलाऊँ तुम को मेरे,मन की इच्छा ओ हनुमान ?
जब मेरी हर इच्छा का है,तुमको पहले ही अनुमान।
चाह तुम्हारी में मिल जाए,मेरे मन की हर इक चाह।
और तुम्हारे चरण-कमल तक,पहुँचे जीवन की हर राह।

यही कामना यही प्रार्थना,और यही है तुमसे आस।
तन से दूर भले हो पर तुम,रहना मेरे मन के पास।
मन-मंदिर में आन विराजो,सीता-राम-लखन के साथ।
नैन बंद कर ध्यान करूँ तो,दर्शन दे देना हे नाथ।

ललित किशोर 'ललित'

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21.09.26

2122 2122, 2122 2121

शुद्ध गीता छंद

मुस्कुराकर राधिका की,राह रोके नंदलाल।
थाम बहियाँ फिर न छोड़े,और चूमे लाल गाल।
शर्म से राधा सिकुड़ कर,श्याम से करती गुहार।
छोड़ दो मेरी कलाई,मत मरोड़ो बार-बार।

ललित किशोर'ललित'

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22.09.26
शुद्ध गीता छंद

क्या हुआ जो आज अपने,पास हैं फिर भी न पास ?
व्यर्थ में तू कर न चिंता,सोच कर मत हो उदास।
हर किसी की ज़िंदगी में,मुश्किलें आती हजार।
जो न चाहे साथ चलना,मत पुकारे बार-बार।

ललित किशोर'ललित'

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24.09.26
शुद्ध गीता छंद

रंग अद्भुत है दिखाती,ज़िंदगानी बार-बार।
दुःख के सँग-सँग दिखाए,रंग सुख के भी हजार।
रंग दुख के कौन चाहे,चाह सुख की है अनंत।
रंग बेरँग हो न सकता,दु:ख सुख का है न अंत।

ललित किशोर 'ललित'

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निश्चल छंद

बड़ी अनोखी देखी नश्वर,जग की रीत।
नये मुखौटे नित्य धारते,देखे मीत।
सागर की लहरों सा नश्वर,है जो प्यार।
उसी प्यार में डूबा देखा,सब संसार।

ललित किशोर 'ललित'

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सितम्बर 2026 की रचनाएँ

07.09.26 चौपई छंद हम पर कृपा करो हनुमान,संकट मोचन कृपा निधान। अब लो पवनपुत्र ये जान,तुम हो बल में पवन समान। सुन लो प्रार्थना महावीर,हर ल...