01.05.2026
विधाता छंद
तुम्हारी भक्ति से हनुमत, मिले सुख-शांति इस मन को।
न कोई दु:ख टिक पाता,न व्यापें व्याधियाँ तन को।
कृपा जितनी तुम्हारी है,बखानी जा नहीं सकती।
तुम्हारे दर्श से दाता,न ये आँखें कभी थकतीं।
ललित किशोर 'ललित'
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05.05.2026
विधाता छंद
नहीं कोई यहाँ अपना,न कोई मीत है मन का।
बनो तुम मीत खुद अपना,यही है सार जीवन का।
अकेले था यहाँ आना,न कोई साथ है जाना।
अनोखी है बड़ी दुनिया,सुने कब दुख भरा गाना।
सुनाओ भी किसी को मत,कभी कुछ आप बीती तुम।
तुम्हारी दुख भरी गाथा,हँसी में वो करेंगें गुम।
करेगा कौन अब चिन्ता, तुम्हारे रूप धन जाँ की।
बसा लो नैन में अपने,कन्हैया लाल की झाँकी।
जपो इक नाम कान्हा का,जपो सँग नाम राधा का।
नहीं फिर राह में होगा,कहीं भी नाम बाधा का।
सुनेगा वो कन्हैया सब,करोगे प्रार्थना जितनी।
सँभाले भी न जाएँगी,भरेगा झोलियाँ इतनी।
ललित किशोर 'ललित'
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विधाता छंद
राधा कृष्ण की मान मनुहार
न जाओ फेरकर नजरें,न रूठो राधिका रानी।
बिना ही बात हम से यों,कहो क्यों रार है ठानी ?
तुम्हारे थे तुम्हारे हैं,तुम्हारे ही रहेंगें हम।
हजारों साल तक रानी,नहीं ये प्यार होगा कम।
मनाने से न मानोगी, रहोगी रूठती कब तक ?
हमारे प्यार की नैया, रहेगी डूबती कब तक ?
इशारों में समझ जाओ,न हम कुछ बोल पाएँगें।
बँधी है डोर जो तुमसे,नहीं हम खोल पाएँगें।
सितारों से तनिक सीखो,सदा क्यों टिमटिमाते हैं।
धरा के प्यार में बेसुध,सदा यों टिटिमाते हैं।
अरे तुम चाँदनी से ही,समझ लो प्यार की बातें।
सदा उस चाँद के ही वो,बिताए साथ में रातें।
ललित किशोर 'ललित'
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12.05.2026
त्रिभंगी छंद
शुभ मंगलकारी,अति सुख कारी,भक्ति तुम्हारी,हनुमंता।
जो मन से ध्यावे,सब सुख पावे,नहीं सतावे, दुख-चिंता।
ओ बजरँग प्यारे,राम-दुलारे,कष्ट हमारे,हर लेना।
ओ केसरि-नंदन,दु:ख निकंदन,राम- भक्ति मन,भर देना।
ललित किशोर 'ललित'
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14.05.2026
त्रिभंगी छंद
अद्भुत शिक्षा
है अद्भुत शिक्षा,रद्द परीक्षा,नित्य निराशा,हाथ लगे।
हर छात्र परेशाँ,पिता परेशाँ,खोती आशा,मात लगे।
हर पाठ पढ़ा था,स्वप्न गढ़ा था,रात-रात भर,जाग सखे।
संकल्प अनूठा,कर ले बेटा,फिर रातों में,जाग सखे ?
ललित किशोर 'ललित'
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31.05.2026
कुण्डलिनी छंद
चल देगा कब वक्त ये,कहाँ कौन सी चाल ?
मानव के मस्तिष्क में,गूँजे यही सवाल।
गूँजे यही सवाल,समय कब शुभ फल देगा ?
कब निखरेगा भाग्य,अँधेरा कब चल देगा।
ललित किशोर 'ललित'
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