रासमाधुरी पुस्तक का विमोचन
महाश्रृंगार छंद विधान व रचनाएँ
हुआ आजाद युवा यूँ आज,नई है सोच नया व्यवहार।
नहीं दिल में कोई जजबात,करे वो खुद ही खुद से प्यार।
उड़े वो दूर गगन की ओर,जैसे कटी पतंग की डोर।
उसे लुटना ही है हर हाल,नहीं चकरी में जिसका छोर।
ललित किशोर 'ललित'
**************************
9.1.18
महाश्रृंगार छंद
गीत
चला आया मैं तेरे द्वार,छोड़कर ये सारा संसार।
श्याम बस इतनी है दरकार,मुझे कर देना भव से पार।
नहीं कर पाया तेरा ध्यान,नहीं पढ़ पाया वेद-पुरान।
नहीं कर पाया पूजा-पाठ,नहीं कर पाया गंगा-स्नान।
हाथ मैं तेरे जोड़ूँ रोज,एक तेरा ही है आधार।
श्याम बस इतनी है दरकार,मुझे कर देना भव से पार।
बनाया तूने सब संसार,चढ़ाऊँ क्या तुझको फल-फूल?
लगाना चाहूँ अपने भाल,प्रभो तेरे चरणों की धूल।
नहीं इस जग में कोई और,सुने जो मेरी करुण पुकार।
श्याम बस इतनी है दरकार,मुझे कर देना भव से पार।
करूँ कैसे तेरा गुणगान,श्याम तू तो है गुण की खान।
लगा दे मेरी नैया पार,जानकर बालक इक नादान।
अरे ओ मुरलीधर घनश्याम,मुझे दर्शन दे दे साकार।
श्याम बस इतनी है दरकार,मुझे कर देना भव से पार।
ललित किशोर 'ललित'
**************************
महाश्रृंगार छंद
छोड़ कर प्यारा घर परिवार,चला तू किस दुनिया की ओर।
वदन मासूम तड़पता छोड़,अरे टूटी साँसों की डोर।
कहाँ तो तिनका तिनका जोड़,बसाया था तूने घर-बार।
कहाँ तू चला गगन की ओर,छोड़ कर काया के नव द्वार।
ललित किशोर 'ललित'
जून 2026 की रचनाएँ
जून 2026 की रचनाएँ 01.06.2026 कुण्डलिनी छंद आएँगीं कठिनाइयाँ,पथ में होंगें शूल। कंटक देंगें यातना,चुभ जाएँगें फूल। चुभ जाएँगें फूल,समय भ...
-
27.06.16 ..👈 आधार छंद रचनाएँ 1 जिस कारण से तू हुआ,गुस्से से भरपूर। मुझको वो बतला जरा,कर दूँ उसको दूर। बिन बदरा बरसे नहीं,क...
-
********************* --दुर्मिल सवैया छंद विधान--- ********************* 1. यह एक वार्णिक छंद है। 2.इसमें चार चरण होते हैं। 3.चार ...
-
******************************** ------मदिरा सवैया छन्द विधान------ ******************************** 1. यह एक वार्णिक छंद है 2. इसकी हर ...